लालू परिवार से परेशान होकर गठबंधन छोड़ाः नीतीश

बिहार में जरूरत थी, लेकिन राहुल गांधी ने भ्रष्ट्राचार के खिलाफ स्टैंड नहीं लिया/अमित शाह के कहने पर प्रशात किशोर को जदयू में लाया/लालू जी से व्यक्तिगत कोई मतभेद नहीं, मगर राजद के साथ काम करना मुश्किल हो गया था

जदयू सुप्रीमो और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गठबंधन से अलग होने की वजह पहली बार खुलकर बतायी है। उन्होंने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में भाजपा के साथ जाने, गठबंधन से अलग होने और लालू परिवार से अपने संबंधों पर बेबाकी से कुछ कहा है। नीतीश ने कहा है कि वे भ्रष्टाचार और अपराध से कोई समझौता नहीं करने वाले हैं। मगर, जब गठबंधन में सहयोगी राजद को लेकर सवाल उठने लगे और गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब हस्तक्षेप करने में अक्षम साबित हुए तो उन्हें ये फैसला लेना पड़ा।

जदयू नेता ने कहा कि उन्होंने राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से कहा था कि आरोपों पर उन्हें जनता के सामने सफाई देनी चाहिए तो उन्होंने ऐसा नहीं किया। हमेशा से भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ उनकी (नीतीश) जीरो टॉलरेंस की नीति रही है। जब आरजेडी के ऊपर अपराध और भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगने लगे तो उनके लिए जवाब देना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि मैंने पार्टी के लोगों संग बैठक की थी, जिसमें गठबंधन से अलग होने का फैसला हुआ।

नीतीश के मुताबिक राजद के काम करने का तरीका गलत था। हमें लालू परिवार के कामकाज के तरीके से ऐजराज था।. राजद दबाव में काम करवाना चाहता था। हमने जब कहा कि आरोपों पर मीडिया के सामने सफाई दीजिए तो उन्होंने इनकार कर दिया। सरकार का काम राजद अगर ठीक ढंग से करने देता तो हमें बाहर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी की अक्षमता के कारण विपक्षी गठबंधन से बाहर निकले थे। राहुल गांधी पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर कोई रूख अख्तियार नहीं कर रहे थे। राहुल गांधी ने कोई बयान तक नहीं दिया।राजद की कार्यशैली ऐसी थी कि मेरे लिये काम करना मुश्किल होता जा रहा था। उनके लोग अपने फरमान के साथ थाने में फोन करते थे।

हालांकि नीतीश कुमार ने कहा कि इन सबके बावजूद भी लालू यादव से उनका राजनीतिक मतभेद हो सकता है लेकिन व्यक्तिगत तौर पर कोई मतभेद नहीं है। नीतीश ने दावा किया कि उन्हें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर को जदयू में शामिल कर लेने का दो बार सुझाव दिया था। प्रशांत किशोर ने हमारे साथ वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में काम किया था। थोड़े समय के लिये वे कहीं और व्यस्त थे। प्रशांत किशोर को समाज के सभी तबके से युवा प्रतिभाओं को राजनीति की ओर आकर्षित करने का काम सौंपा गया है।

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