शहीद सीताराम का गांव में अंतिम संस्कार, श्रद्धांजलि

गिरिडीह, 19 मई: जम्मू-कश्मीर के आरएसपुरा और अरनिया सेक्टर में गुरुवार की रात को शहीद हुए गिरिडीह जिले के उग्रवाद प्रभावित पीरटांड़ प्रखंड के पालगंज निवासी ब्रजनंदन उपाध्याय के पुत्र सीताराम उपाध्याय का शव उनके गांव  पालगंज पहुंचते ही सभी की आखें रो पड़ी और भारत माता की जय, शहीद सीताराम अमर रहे के जयकारे लगने लगे. साथ ही पाकिस्तान मुर्दाबाद के भी नारे लगाये गये. लोग तख्तियों में नारे लिखकर लहरा रहे थे. पालगंज में गिरिडीह जिले भर से हजारों लोग पहुंचे और शहीद को श्रद्धांजलि दी.  बारिश के साथ ओलावृष्टि ने भी अपने वीर सपूत को नमन कर श्रद्धांजलि दी. पालगंज में शनिवार को हाट लगता था, लेकिन शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए दुकानदारों ने हाट को बंद कर दिया. शाम सात बजे शहीद के शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. शहीद सीताराम का शव जम्मू-कश्मीर से पहले दिल्ली और फिर दिल्ली से रांची प्लेन से लाया गया. उसके बाद सड़क मार्ग से शव को पैतृक गाँव पालगंज लाया गया. शव के साथ बीएसएफ के उनके जवान साथी आये थे.

बताते चले कि शहीद सीताराम गिरिडीह जिले के उग्रवाद प्रभावित पीरटांड़ प्रखंड के पालगंज के रहनेवाले थे. प्राथमिक पढाई पालगंज और फिर उच्च शिक्षा मधुवन से प्राप्त करने के बाद उन्होंने बीएसएफ में नौकरी प्राप्त कर देश की सेवा में उतर गये थे. शहीद सीताराम के दो बच्चे हैं। एक पुत्री तीन साल की और एक पुत्र एक साल का। उनकी शादी रेशमी देवी से चार साल पहले हुई थी. वह 18 अप्रैल से छुट्टी पर थे. इस दौरान उन्होंने अपने बेटे का मुंडन भी करवाया. बेटे का मुंडन करवाने के बाद 2 मई, 2018 को ड्यूटी पर लौट गये थे. कहा था कि जुलाई में फिर गांव आयेंगे.

पालगंज और गिरिडीह में शहीद की याद में बनायी जाय विसाल प्रतिमा : राजेश

गिरिडीह के सपूत शहीद सीताराम उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण ही आज पाकिस्तान की लगातार छाती चौड़ी होती जा रही है. भारत सरकार के समर्थक जम्मू कश्मीर की सरकार ने रमजान के महीने में  सीजफायर कर रखा था, जबकि पाकिस्तान अपनी दोमुहे राजनीति के कारण पूरे विश्व में जाना जाता है, उसने इस बात को नहीं माना और हमारे गिरिडीह के सपूत को गोली मार दी.
गिरिडीह की जनता पालगंज की जनता इस बात से आहत है कि शहीद के परिवार पत्नी और बच्चे को ध्यान में रखते हुए एक करोड़ मुवावजे के परिवार को दे, जिससे उनके बच्चे को अच्छी तालीम मिले और परिवार पर आर्थिक बोझ पूरी जिंदगी नहीं हो. साथ ही साथ पालगंज और गिरिडीह में शहीद की विशाल मूर्ति बने ताकि गिरिडीह की जनता हमेशा ऐसे वीर सपूत को याद कर सके इसकी वीरता की गाथा गा सके.

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