सवर्ण आरक्षण के खिलाफ पीएम का पुतला फूंका

संविधान के कथित अपमान के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने कहा कि सवर्ण आरक्षण मंजूर नहीं

चांडिल (जमशेदपुर)/ विशद कुमार। 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण के विरोध में तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद प्रर्दशन के तहत प्रतिवाद प्रदर्शन के अंतिम दिन जमशेदपुर के चांडिल प्रखंड के असोनबोनि गांव में झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया। इस अवसर पर झारखंड जनतांत्रिक महासभा के अनूप महतो ने बताया कि राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद प्रर्दशन के तहत आज 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण के विरोध में हमलोगों ने प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया। अबतक बिहार, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, झारखंड समेत कई जगहों में विरोध प्रदर्शन किया गया। सवर्णों सहित समाज के भीतर मौजूद गरीबी-बेरोजगारी का समाधान आरक्षण के जरिए नहीं हो सकता है। गरीबी-बेरोजगारी के सवालों का जवाब पूंजी की लूट और पूंजीपतिपरस्त नीतियों पर लगाम लगाकर ही हो सकता है। लेकिन मोदी सरकार अंबानी-अडानी की लूट और पूंजी की लूट बढ़ाने वाली नीतियों को ढंककर संविधान व सामाजिक न्याय पर हमला कर रही है।

कर्यक्रम में दीपक रंजीत ने सवाल उठाया कि 8 लाख कमाने वाला गरीब कैसे हो गया? साथ ही मांग की कि एसटी, एससी व ओबीसी का आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 73 फीसद हो। सवर्ण आरक्षण शासन-सत्ता की संस्थाओं व विभिन्न क्षेत्रों में सवर्णों के वर्चस्व को मजबूत करेगा। दलितों-आदिवासियों व पिछड़ों की भागीदारी को कमजोर करेगा। इससे लोकतंत्र कमजोर होगा। दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों की वंचना बढ़ेगी। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

डॉ रुपाय माझी ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है कि शासन-सत्ता की विभिन्न संस्थाओं व क्षेत्रों में दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों की संख्यानुपात में भागीदारी हो। लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार ने सवर्णों को आरक्षण देकर लोकतंत्र को कमजोर करने और एक आधुनिक राष्ट्र के निर्माण को रोकने का काम किया है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि अगर सवर्ण आरक्षण केंद्र सरकार रद्द नहीं करती है तो बहुजन समाज भारत बंद की ओर आगे बढ़ेगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मंगला पहाड़िया, चैतन्य पहाड़िया, गुरुचरण पहाड़िया, बांका पहाड़िया, खेतु पहाड़िया, कार्तिक पहाड़िया, फुलमनी पहाड़िया, कमलेश सिंह, लखिमनी पहाड़िया, लीलमनी पहाड़िया, सरावन पहाड़िया सहित कई लोग मौजूद थे।

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