सुपर स्टॉर अमिताभ बच्चन को साइबर शातिरों ने बनाया मोहरा

साइबर अपराधियों ने बदला अपना ट्रैक/साइबर क्राईम की राजधानी के नाम से पहचान बना चुका है जामताड़ा

जामताड़ा/ संवाददाता। साइबर क्राईम की राजधानी के नाम से प्रसिद्ध करमाटांड़ के साइबर अपराधियों ने इन दिनों साइबर क्राईम करने का ट्रेक बदल दिया है। पहले वे लोग बैंक अधिकारी बन कर लोगों को चूना लगाते थे। लेकिन अब उन लोगों ने अपना पूरा का पूरा ट्रैक ही चेंज कर दिया है। अब वे लोग कौन बनेगा महाकरोड़पति के नाम से लोगों को चूना लगाने का काम करते हैं।

कैसे देते है साइबर क्राईम को अंजाम

सबसे पहले आम लोगों के पास वॉट्सप नंबर से फोन आता है। फोन करने वाला बताता है कि मैं मुंबई से कौन बनेगा महाकरोड़पति से बोल रहा हूं। आपके जियो नंबर पर 25 लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। उसके बाद आपके व्हाट्सएप नंबर पर कौन बनेगा महाकरोड़पति का फोटो भेजा जाता है। जिसमें फिल्मी दुनिया सुपर स्टॉर अमिताभ बच्चन का फोटो और अन्य कुछ लिखा हुआ दिया जाता है। उसके बाद साइबर अपराधियों के जरिए कहा जाता है कि अगर आप पैसा लेना चाहते हैं तो आप व्हाट्सएप पर दिये गये मेसेज को देखने के बाद फोन करें। उसी के बाद साइबर अपराधी अपना काम करने में लग जाते हैं। लोगों से उसका आधार नंबर और बैंक खाता नंबर मांग किया जाता है।

मंगलवार को न्यू टाउन में रहने वाली एक महिला के मोबाईल नंबर पर इसी प्रकार से फोन आया। मोबाईल नंबर 923034710610 से उक्त महिला को फोन आया। उससे बोला गया कि कौन बनेगा महाकरोड़पति से आपको 25 लाख का चेक आया है। महिला ने नाम न बताने की शर्त पर हमें ये जानकारी दी। बताते चलें कि कुछ दिन पहले भी एक युवक को ठीक इसी नंबर से फोन आया था। अब देखना है कि पुलिस इस पर कैसे अंकुश लगा पाती है।

सुपर स्टॉर अमिताभ बच्चन का सहारा

साइबर चोरों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि अब वे सुपर स्टॉर अमिताभ बच्चन की तस्वीरों का भी सहारा लेने लगे हैं। इससे पता चल रहा है पुलिस का खौफ इन लोगों में नहीं है।
जिले में बढ़ते साइबर अपराध की ग्राफ को देखते हुए साइबर थाना भी खोला गया। साइबर डीएसपी सहित थाना प्रभारी भी थाने में नियुक्त किये गये। लेकिन उसका कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है।

कैसे शुरू हुआ साइबर क्राईम का खेल

साइबर क्राईम का खेल करीब 5 से 6 साल पहले शुरू किया गया था। उस वक्त इन साइबर चोरों के जरिए लोगों के खाते से पैसा नहीं उड़ाया जाता था बल्कि मोबाईल रिचार्ज करने वाले डीलर और दुकानदार के मोबाईल से रिचार्ज का पैसा उड़ाने का काम किया जाता था। समय बीतता गया और उनलोगों का मनोबल बढ़ता गया। पुलिस ने भी इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। उसके बाद से इन लोगों ने बैंक मैनेजर बन कर लोगों के खाते से पैसा उड़ाने का काम शुरू किया। जो अभी तक चल रहा है। लेकिन पुलिस अब तक साइबर क्राईम पर पूर्ण रूप से अंकुश नहीं लगा पायी है। अंकुश तो दूर अब तो उन लोगों ने साइबर क्राईम करने का नया तरीका भी ढूंढ लिया है। अब पुलिस की परेशानी और बढ़ने वाली है।

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