हुई मुद्दत के ‘ग़ालिब’ मर गया, पर याद आता है

27 दिसंबर 2018: मिर्जा ग़ालिब के 221वें जन्मदिवस पर विशेष

अमित राजा

नज्मों, शेरों और ग़ज़लों के शहंशाह मिर्जा ग़ालिब का 27 दिसंबर गुरुवार को 221वां जन्मदिवस है। इसी दिन वर्ष 1797 को उप्र के आगरा के कला महल में उनका जन्म हुआ था। वे मुगलकाल के महानतम कवि और शायर थे। उनकी रचनाओं से इश्क रूह तक पहुंचता है। उनकी पहली भाषा उर्दू थी। लेकिन, उन्होंने फारसी में भी कई ग़ज़लें लिखीं। उनकी शायरी दिलों तक पहुंच कर आवाज देती हैं। उनके जन्म दिवस पर पेश है उनकी कुछ खास पंक्तियां।

ये न थी हमारी किस्मत के विसाल (मिलन)-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतजार होता

तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता

तेरी नाज़ुकी से जाना कि बंधा था अहद (प्रतिज्ञा) बोदा (खोखला)
कभी तू न तोड़ सकता अगर उस्तुवार (दृढ़ और अटल) होता

कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीमकश (खींचा हुआ तीर)को
ये ख़लिश (चुभन) कहां से होती जो जिगर के पार होता

ये कहां की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह (उपदेशक)
कोई चारासाज (सहायक) होता, कोई ग़मगुसार (सहानुभूति रखने वाला) होता

रग-ए-संग (पत्थर की नस) से टपकता वो लहू कि फिर न थमता
जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार (अंगारा) होता
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न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता!

हुआ जब ग़म से यूँ बेहिस (हैरान), तो ग़म क्या सर के कटने का?
न होता गर जुदा तन से, तो ज़ानू (घुटनों) पर धरा होता

हुई मुद्दत के ‘ग़ालिब’ मर गया, पर याद आता है
वो हर इक बात पर कहना, कि यूं होता तो क्या होता?
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हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे
कहते हैं के गालिब का है अंदाज़-ए-बयां और

(सुखनवर = कवि, शायर), (अंदाज़-ए-बयां = वर्णन शैली)

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी जैब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है

(पैराहन = वस्त्र), (जैब = गरिबान, कुर्ते की कंठी), (हाजत-ए-रफ़ू = सिलाई की ज़रुरत)

जला है जिस्म जहां दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

(जुस्तजू = तलाश, खोज)

रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है

(ताक़त-ए-गुफ़्तार = बोलने की शक्ति), (आरज़ू = कामना, इच्छा, लालसा)

                             आलेख में तस्वीर महान पेंटर वॉन गोग की तस्वीर है।

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