’18’ के खराब अंत को ’19’ में पाटेंगे नरेंद्र मोदी!

वर्ष 2018 के अंत तक ‘पप्पू’ की छवि से राहुल निकले और परिपक्व बन कर उभरे/ साल के अंत में हुए सियासी नुकसान की भरपाई के लिए पीएम मोदी वर्ष 19 के शुरूआती 100 दिनों में करेंगे 20 राज्यों का दौरा

बीत रहा साल 2018 ने किसी को फलक से जमीन पर पटक दिया तो किसी को बुलंदी दी है। बात देश के दो मौजूदा प्रभावशाली लोगों मसलन पीएम मोदी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की हो रही है। यह वही साल रहा जहां गुजरात व हिमाचल चुनाव में काफी कोशिश के बाद भी राहुल गांधी अपनी पप्पू वाली इमेज से बाहर नहीं आ पाये। मगर, इस साल के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव में उम्दा प्रदर्शन कर राहुल गांधी ने खुद को केवल ‘पप्पू’ के इमेज से बाहर हीं नहीं निकाला, बल्कि अपने को परिपक्व राजनीतिज्ञ भी साबित कर दिया। दूसरी ओर हरेक चुनाव में कांग्रेस का सफाया करने यज्ञ पर निकले पीएम मोदी का अश्वमेघ मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पकड़ लिया गया।

साल के अंत में राहुल को उपलब्धि हासिल हुई तो मोदी को झटका लगा। जाहिर है अब नरेंद्र मोदी साल के अंत के नुकसान की भरपाई पर जोर देंगे तो राहुल गांधी अपने प्रदर्शन को कायम रखना चाहेंगे। राहुल की बात करें और जरा पीछे लौटें तो उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव 2004 में जीता था। देश के सबसे रसूखदार राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद उनके राजनीतिक प्रशिक्षण में बहुत वक्त लगा।

बतौर नेता राहुल के शुरुआती दस साल उनकी ही पार्टी की सरकार केंद्र में रही। लेकिन, राहुल गांधी से जिस राजनीतिक परिपक्वता की उम्मीद खुद कांग्रेस पार्टी को थी, वह उनमें नहीं दिखी। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव आते-आते राहुल से ‘पप्पू’ उपनाम चिपक गया था। 2014 के बाद भी कुछ सालों तक उनकी यही स्थिति रही। हालांकि, वे इस बीच पार्टी उपाध्यक्ष के पद तक पहुंचने के बाद अध्यक्ष तक बन गये। अध्यक्ष बनने के बाद भी उनकी कई मामलों में किरकिरी हुई। लेकिन, अब तीन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन के बाद वे उभर कर सामने आये हैं और माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे बड़े नाम भी उन्हें नजर में रखकर ही अपनी रणनीतियां तैयार करने लगे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल के अंत में मिले सियासी झटके की भरपाई के लिए इस साल की शुरूआत में 100 दिन के भीतर देश के 20 राज्यों का दौरा करेंगे। जानकारी के अनुसार मोदी के इन दौरों में मोदी उन 123 लोकसभा सीटों पर ध्यान देंगे, जिन्हें भाजपा 2014 की लहर के बावज़ूद नहीं जीत सकी थी। मोदी के संभावित दौरों वाली 77 सीटें पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में है। मालूम हो कि इन राज्यों से भाजपा 2014 में सिर्फ 10 सीटें जीत सकी थी।

भाजपा के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि पार्टी 2019 में इस स्थिति को बदलने की रणनीति बना चुकी है। इस मुतल्लिक सभी 123 सीटों को 25 समूहों में बांटकर हरेक समूह के लिए एक बड़े नेता को प्रभारी बनाया गया है। प्रधानमंत्री की रैलियां इन इलाकों में इसी रणनीति के तहत आयोजित की जा रही हैं। बताते हैं कि इस रणनीति के तहत अभियान की शुरूआत 24 दिसंबर से हो चुकी है। यह अभियान आने वाले लोक सभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से कुछ पहले तक जारी रखा जाएगा।

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