25 लाख के इनामी नक्सली ने किया आत्मसमर्पण

नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) को फिर एक बड़ा झटका/दुमका एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड, गिरिडीह जेल ब्रेक समेत 2 दर्जन से अधिक कांडों में बलवीर था संलिप्त/ गिरिडीह, संथाल, जमुई समेत कई इलाकों में सक्रिय था कुख्यात नक्सली लड़ाका बलवीर/ संताल परगना के कई नक्सली वारदातों में शामिल था सरेंडर करने वाला यह माओवादी लड़ाका

गिरिडीह/ संवाददाता। नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के सैक (स्पेशन एरिया कमेटी) सदस्य हार्डकोर नक्सली बलबीर महतो उर्फ रौशन ने पुलिस के समक्ष गुरुवार को सरेंडर कर दिया। 25 लाख के इस इनामी नक्सली के आत्मसमर्पण से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। उसके सरेंडर करने पर सरकार ने उसके परिवार को कई तरह की सुविधा मुहैया करायी है। न्यू पुलिस लाईन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस कुख्यात नक्सली ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के डीआईजी पंकज कंबोज, एसपी सुरेंद्र कुमार झा, डीडीसी मुकुंद दास व अन्य अधिकारियों के समक्ष संबोधित किया। इस दौरान झारखंड आत्मसमर्पण नीति के तहत नक्सली बलवीर और उसके परिवार को सुविधा उपलब्ध करायी गयी।

नक्सली को सौंपा गया 25 लाख का चेक

अधिकारियों ने बलबीर को 25 लाख रूपया का चेक सौंपा। मौके पर डीआईजी श्री कंबोज ने कहा कि समाज से भटके लोग मुख्य धारा में लौटे, जिंदगी सुधारने के लिए सरकार ने बहुत ही बेहतर योजना बना रखी है। झारखंड सरकार की आत्म समर्पण नीति पूरे देश में सबसे बेहतर है। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ, पुलिस, प्रशासन के प्रयास से यह नक्सली मुख्य धारा में लौटा है। जो नक्सली मुख्यधारा में नहीं लौटते हंै, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने कहा कि सरेंडर किए नक्सली ने बहुत प्रमुख कांडों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। नक्सली सरेंडर करें और मुख्यधारा से जुड़कर योजना का लाभ लें, वरना पुलिस की गोली उनके लिए तैयार है। कार्यक्रम को डीडीसी मुकुंद दास, एएसपी दीपक कुमार आदि ने संबोधित किया।

कई इलाकों में था बलवीर का वर्चस्व

मालूम हो कि सरेंडर करने वाला बलवीर जिले के पीरटांड़ प्रखंड के पांडेयडीह इलाके का रहने वाला है। बलवीर पिछले 2 दशक से नक्सली संगठन से जुड़ा हुआ था। वह पिछले एक दशक से संताल परगना क्षेत्र में हुए कई नक्सली वारदातों में शामिल था। साथ ही उसने जमुई, गिरिडीह समेत कई इलाकों मे अपना वर्चस्व बना रखा था।

इन कांडों में थी बलवीर की संलिप्तता

बलबीर महतो ने वर्ष 2012 में गिरिडीह जेल ब्रेक कांड, दुमका के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड, वर्ष 2006 में सोनो थाना क्षेत्र में दो ट्रैक्टर जलाने की घटना व चरका पत्थर गांव के चौकीदार की हत्या, वर्ष 2015 में 2 बार संताल परगना में गाड़ी जलाने, वर्ष 2006 में केड़ा पहाड़ी गांव में अपराध करने व गाड़ी जलाने और वर्ष 2017 में देवघर जिले के सुनील पहड़िया हत्याकांड में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इसके अलावा वर्ष 2011 में सारंडा जंगल में जेआरसी मीटिंग के साथ हुई मुठभेड़, वर्ष 2014 के अगस्त में जमुई जिले के खैरा के गिद्धेश्वर जंगल में मुठभेड़, गोड्डा जिले के सोनापहाड़ी में वर्ष 2016 में हुए मुठभेड़ में भी वह शामिल था। वहीं वर्ष 2018 के जुलाई व अगस्त में दुमका जिले के गोपीकांदर थाना पुलिस के साथ मुठभेड़, जिसमें 2 लोग मारे गए थे में भी वह शामिल था। जबकि डुमरी थाना क्षेत्र के मुरकुंडो गांव में फुटबॉल मैच के दौरान पूर्व नक्सली दिनेश मांझी की गोली मारकर हत्या करने में भी बलवीर ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। साथ ही उसने कई ठेकेदारों व क्रशर मालिकों से लेवी वसूलने में शामिल रहा था।

सरेंडर के दौरान ये थे मौजूद

आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु आईएएस प्रेरणा दीक्षित, प्रशिक्षु आईपीएस नाथु सिंह मीणा, सीआरपीएफ के द्वितीय कमांडेंट अनिल शर्मा, तिलक राज, एसडीपीओ जीतवाहन उरांव, डीएसपी संतोष मिश्रा, एसडीपीओ विनोद महतो, नीरज सिंह समेत कई पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे।

 

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