गुजरातः मोदी-शाह की प्रतिष्ठा कवच बनेगी जीएसटी पर राहत?

प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के गृह प्रदेश में घेराबंदी की कांग्रेसी कवायद

गुजरात विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 जनवरी को समाप्त हो रहा है और वहां इस साल के अंत में चुनाव हो सकते हैं। इस मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के गृह प्रदेश गुजरात में भाजपा की घेराबंदी की कवायद में लगी कांग्रेस को सरकार विरोधी यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी के तीरों से राहत दिख रही है। जबकि भाजपा जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद किए ऐलान का बड़ा फायदा होने की आस में है।

गुजरात में सबसे खास कारोबार माना जाता है। सो, जीएसटी के पेंच से कारोबारी नाराज दिख रहे थे। ऊपर से अर्थव्यवस्था की सुस्ती और उसपर भाजपा के भीतर भी बवाल से मोदी सरकार की गुजरात को लेकर चिंता जायज है। मगर, भाजपा यह भी मान रही है कि जीएसटी में राहत का फायदा व्यापारियों को होगा। जीएसटी में राहत के तहत जिन 27 कैटेगिरी में जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया है, इनमें आठ ऐसे वर्ग हैं, जिसका बड़ा खिलाड़ी गुजरात है।

ऐसे में गुजराती कारोबारियों पर इस फैसले का अधिक सकारात्मक असर होगा। इस कैटेगिरी में दर 12 से घटाकर 5 फीसदी की गई है। खाद्य पदार्थों में खाखरा जैसी नमकीनों पर भी दरें कम की गई हैं। इसके अलावा टेक्सटाइल, ज्वैलरी में भी दरें कम की गई हैं। इन सभी धंधों में गुजरात बहुत आगे है। दूसरी ओर कांग्रेस गुजरात में भाजपा से दो-दो हाथ कऱने के लिए कमर कस रही है। कांग्रेस प्रधानमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके गढ़ में घेरने की कोशिश कर रही है। गुजरात पाटीदार आंदोलन सुर्खियों में रहा है। वहां का पटेल समुदाय सरकार से नाराज है।

हालांकि कांग्रेसी चाणक्य कहे जाने वाले अहमद पटेल खुद मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं। वे पर्दे के पीछे सभी भाजपा विरोधी गुटों को एकजुट करने में लगे हैं। अगर भाजपा की सीटें कम हो जाती हैं और भाजपा को बहुमत नहीं मिल पाता है तो कांग्रेस के लिए ये काफी बड़ी उपलब्धि होगी। देश की राजनीति में ये एक बड़ा भूचाल होगा।

उधर भाजपा गुजरात में कार्यकर्ताओं से कह रही है कि अगर उन्हें उत्तर प्रदेश में अधिक सीटें मिल सकती हैं तो प्रधानमंत्री के गृह राज्य में और अधिक सीटें मिलनी चाहिए। भाजपा ने अपने लिए बड़ा टार्गेट रखा है। आने वाले चुनावों में दलित मुद्दा भी संवेदनशील मुद्दा बनेगा और राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद को चुन कर भाजपा ने हद तक इसकी तैयारी कर ली है। लेकिन दलित समाज में जो बेचैनी है, उसे देखकर यही लगता है कि यह दूर नहीं होगी। ऐसे में अगर कांग्रेस तरीके से चुनाव लड़ती है तो भाजपा से नाराज जो भी ऐसे गुट हैं वे एक साथ आ सकते हैं। हालांकि देश की आर्थिक सुस्ती के बीच शनिवार को वल्र्ड इकोनोमिक फोरम का सामने आया स्टडी भाजपा को राहत दे रहा है। इस स्टडी में भारत की ग्रोथ का अनुमान चीन के मुकाबले बेहतर बताया गया है। चुनाव में अभी समय है। इस बीच कुछ सकारात्मक या नकारात्मक खबरों से भी भाजपा और कांग्रेस का गुजरात में भविष्य निर्धारित होगा।

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