छह दिन की बारिश भी नहीं झेल सका पाकुड़ के विकास का सेतु

पाकुड़ से महेशपुर को जोड़ने वाला बासलोई पुल ढहा/वर्ष 2015 में स्थानीय नेताओं के प्रयास से बना था पुल/मिट्टी और गारे से नहीं, नौ करोड़ की लागत से तैयार हुआ था ब्रिज/डीसी ने दिये जांच के आदेश, इसे लेकर अधिकारियों की विशेष बैठक आज

महेशपुर (पाकुड़)/ संवाददाता। झारखंड गठन के बाद से ही सड़क व पुल को विकास का पैमाना बताने वाली सरकार का बनाया गया महेशपुर का बासलोई पुल छह दिन की बारिश भी नहीं झेल पाया और रेत के महल की मानिंद ढह गया। इलाके के लोग डेवलपमेंट के प्रतीक इस ब्रिज को विकास के ढहने के तौर पर भी देख रहे हैं। क्योंकि पुल महेशपुर की लाइफ लाइन थी। इसी से गुजर कर लोग जिला मुख्यालय पाकुड़ जाया करते थे। ऐसा भी नहीं कि यह पुल ईंट, मिट्टी और गारे से बना था, बल्कि इसे बनाने में वर्ष 2015 में नौ करोड़ रुपये की लागत आयी थी। बहरहाल, पुल के ढहने से महेशपुर का पहिया थम गया है। क्योंकि यही पुल महेशपुर को पाकुड़ से जोड़ता था। इधर पुल ढहने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पाकुड़ के डीसी कुलदीप चौधरी ने जांच का आदेश जारी कर दिया है। साथ ही इसे लेकर मंगलवार को एक प्रशासनिक बैठक होगी।

लोगों के लिए पुल का ध्वस्त होना है दोहरी मार

पिछले छह दिनों से हो रही झमाझम बारिश से जहां जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित रहा, वहीं इस पुल का एकाएक ध्वस्त हो जाना प्रखंडवासियों के लिए दोहरे मार की तरह है। ज्ञात हो कि जिला मुख्यालय से महेशपुर व पाकुड़िया प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र को जोड़ने वाला प्रमुख पुल का निर्माण स्थानीय नेताओं के प्रयास से विशेष प्रमंडल ने लगभग 9 करोड़ की लगात से वर्ष 2015 में कराया था। जमाल कंस्ट्रक्शन ने इस पुल को बनाया था। उधर, पुल के ध्वस्त हो जाने से लोग विभाग पर सवाल उठा रहे हंै। वैसे ग्रामीण पुल के पिलर के पास से अवैध रूप से बालू उठाव को भी पुल के ध्वस्त होने की वजह बता रहे हैं।

कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से टूटा संपर्क

प्रखंड के अंतर्गत बांसलोई नदी चंडालमारा घाटचोरा में करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल के ध्वस्त हो जाने से हजारों लोगों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। मौके पर मौजूद कई ग्रामीणों ने बताया कि पुल बनाने में संवेदक ने काफी अनियमितता बरती थी और इसी पुल निर्माण के कुछ माह बाद ही उक्त पुल में दरारें पड़ गयी थीं। जिसकी ग्रामीणों ने शिकायत भी की थी।

पुल के नीचे से बेराकटोक हो रहा था बालू उठाव

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से बासलोई नदी से बालू माफिया अंधाधुंध बालू उठाव कर रहे थे। बालू माफिया सारे नियमों को दरकिनार कर पुल के पिलर के पास से बालू का उठाव करने लगे। लोगों ने कहा कि वर्ष 2017 में इस बाबत कई बार प्रशासन से शिकायत भी की गयी। मगर, कोई कार्रवाई नहीं हुई। महेशपुर एसडीपीओ शशि रंजन ने भी कई बार इस पर चिंता जाहिर की थी। मगर, बालू माफिया के हौसले के आगे सब बेकार रहा। पुल के ध्वस्त होने की खबर सुन कर बीडीओ उमेश मंडल, थाना प्रभारी उमाशंकर सिंह, देवानंद प्रसाद समेत पूर्व विधायक सुफल मरांडी ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। इधर, जिला जन संपर्क पदाधिकारी कुमार गौतम ने बताया कि डीसी कुलदीप चौधरी ने पुल ढहने के मामले में जांच के आदेश दिये हैं। साथ ही मंगलवार को इसे लेकर अधिकारियों की एक बैठक होगी।

घर गिरने से सास, बेटी और दामाद की मौत, लगातार हो रही बारिश से धंसा घर

जामा (दुमका)/निज संवाददाता। तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण रविवार की रात दुमका जिला के जामा थाना क्षेत्र अंतर्गत अमझार गांव में घर गिर जाने से उसमें सोये तीन लोगों की मौत गयी। अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि मरने वाले में लक्खू मरांडी, उसकी पत्नी लुक्खी मुर्मू और लुक्खी की मां आमडर मुर्मू शामिल हंै। तीनों एक ही कमरे में सोये थे। जबकि मृतक दंपति के दो बच्चे राकेश मरांडी (10 वर्ष) और मुकेश मरांडी (4 वर्ष) दूसरे के घर में सोये थे, जिस कारण दोनों की जान बच गयी।

अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि जामा बीडीओ साधुचरण देवगम, सीओ अनूप कच्छप और थानेदार कुंदनकांत विमल ने मौके पर जाकर राहत सामग्री उपलब्ध करायी है। मृतकों के आश्रितों को राहत के तौर पर तत्काल 50 किलो चावल और 20 हजार रुपये दिये गये हैं। आगे आपदा प्रबंधन से समुचित मुआवजा दिया जायेगा। अनुमंडल पदाधिकारी ने यह भी बताया कि वर्षा के कारण जिला में अबतक कुल चार घर गिरने की जानकारी मिली है। जिनके घर गिरे हैं राहत के तौर पर तत्काल उन्हें अनाज, कंबल, तिरपाल आदि दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि वर्षा से जिले में हुई क्षति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा रही है।

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