आईएसएम स्टूडेंट द्वारा संचालित कर्तव्या संस्था के दसवें वार्षिकोत्सव सम्पन्न


धनबाद. आईआईटी (आइएसएम) के छात्रों द्वारा संचालित कर्त्तव्य संस्था के दसवें वार्षिकोत्सव पर आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में दिल्ली पब्लिक स्कूल के सातवीं कक्षा का छात्र मोहन अनंदा चक्रवर्ती की स्मार्ट हेलमेट प्रोजेक्ट को देख लोग खासे प्रभावित हुए.

मोहन अनंदा का दावा है कि यह स्मार्ट हेलमेट एंड बाइक सिस्टम दुर्घटनाओं में कमी लाएगा. छात्र ने बताया कि अगर चालक शराब पी रखी है और इस स्मार्ट हेलमेट को पहनकर बाइक चलाने की कोशिश करेगा तो उसकी बाइक स्टार्ट नही होगी।

दरअसल इस सिस्टम में हेलमेट में एक स्विच लगाया जाता है जो बाइक से भी कनेक्ट रहेगा. जब चालक हेलमेट पहनेगा तो स्विच ऑन हो जाएगा और फिर सिस्टम काम करने लगेगा.

उन्होंने बताया चालक अगर. 9 की मात्रा से ऊपर शराब पी रखी है तो ऐसे में सिस्टम में लगा सेंसर काम करने लगेगा. जिसके बाद बाइक स्टार्ट नही होगी. इसमे दूसरी खासियत यह है कि यह पूरा सिस्टम बैटरी से काम करती है.

बैटरी डाउन होने की सूचना भी चालक को मिलती रहेगी. वोल्टेज अगर 40 प्रतिशत से कम होने पर बर्जर बजेगा जो बैटरी चेंज करने का निर्देश देगा. इसकी एक खूबी यह भी है कि बाइक से हेलमेट कनेक्ट रहने की वजह से बाइक स्टार्ट के लिए हेलमेट पहनना भी जरूरी होगा.

उन्होंने बताया इस सिस्टम को तैयार करने में दो दिन का समय लगा. सिस्टम में आरएफ मॉड्यूलर, एल्कोहलिक सेंसर, 1k का चार रजिस्टर, वायर, रिले, बैटरी कैप, पुश स्विच लगाया जाता है. उन्होंने बताया कि भारत मे हर दिन बाइक दुर्घटना में 3300 लोगो की जाने जाती है. करीब 70 प्रतिशत बगैर हेलमेट के बाइक चलाने वाले होते है.

उन्होंने बताया कि अपने इस टेक्नोलॉजी को पेटेंट कराने के लिए भारत सरकार के अधिनस्त संस्था एमएसएमई को एक दिन पहले ही पत्र लिखा है. साथ ही इस प्रोडक्ट को लार्ज स्केल में तैयार करके लोगो मे विक्रय करने हेतु लोन के लिए भी डिमांड किया है. उन्होंने बताया इस टेक्नोलॉजी की कीमत साढ़े चार सौ रुपए होगी.

 

स्मार्ट की टेक्नोलॉजी नेत्रहीन को पहुँचाएगी मदद

इस विज्ञान प्रदर्शनी में बच्चो की एक से बढ़कर एक प्रतिभा देखने को मिली. डीएवी कोयलानगर के पांचवी कक्षा का छात्र सम्राट कुमार बोस ने स्मार्ट शु एंड स्मार्ट ग्लास बनाया है.

इसकी खासियत यह है कि अगर कोई नेत्रहीन व्यक्ति स्मार्ट शु का इस्तेमाल करता है तो सिस्टम में लगा सेंसर पैर के सामने की चीज उसे इंडिकेट करेगी. सिस्टम में लगा बर्जर बज उठेगा. इससे व्यक्ति को पैर के सामने किसी चीज के होने का आभास हो जाएगा. स्मार्ट ग्लास भी इसी तरह से कार्य करता है. सम्राट ने बताया कि दोनों प्रोडक्ट को तैयार करने में कुल 1800 रु की लागत आती है.

विज्ञान प्रदर्शनी में 20 से ज्यादा मॉडल की प्रदर्शनी

इस विज्ञान प्रदर्शनी में विभिन्न स्कूलों से करीब 120 बच्चो ने ग्रुप वाइज अलग अलग थीम पर 20 से ज्यादा प्रदर्शनी लगाई है. इन मॉडल में ऑटोमेटिक स्ट्रीट लाइट, सोलर सिंचाई, ड्रोन, वाटर फिल्टर, एयर पॉलियुशन आदि प्रोजेक्ट शामिल है. इसके अलावे बच्चो ने पोस्टर प्रतियोगिता में भी भाग लेकर सेव चाइल्ड, क्लाइमेट चेंज, जंक फूड, नो टू ड्रग आदि पर आधारित पोस्टर बनाए है.

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