नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के 123 वीं जयंती राजकीयकृत मध्य विद्यालय धैया में मनाई गई

◆ नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के 123 वीं जयंती के अवसर पर धूप दीप ,पुष्पांजलि अर्पितकर श्रद्धा सुमन की गई। 

◆ क्रांतिकारी आंदोलनकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन पर वरीय शिक्षक राजकुमार वर्मा ने प्रकाश डालते हुए उनके तरह मेधावी छात्र व राष्ट्र भक्त बनने की अपील बच्चों से की।
★ उनका संदेश तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा
■ जय हिंद का नारा आज भी हर भारतीय के जुबान पर है

धनबाद। सुभाष चंद्र बोसजी का जन्म 23 जनवरी, सन 1897 ई. में उड़ीसा के कटक नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता का नाम ‘जानकीनाथ बोस’ और माँ का नाम ‘प्रभावती’ था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। वे बंगाल विधान सभा के सदस्य भी रहे थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें ‘रायबहादुर का ख़िताब’ दिया था।


नेताजी एक बहुत मेधावी छात्र थे। उन्होंने इंग्लैंड में जाकर आई. सी. एस. की परीक्षा उत्तीर्ण की।
नेताजी नौकरी छोड़ कर भारत आ गए और यहाँ पर गाँधी जी से मिले और स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में कूद पड़े।
*सुभाष चंद्र बोस ने ‘फ़ारवर्ड ब्लॉक’ की स्थापना की ओर आज़ाद हिन्द फौज के “प्रधान सेनापति” भी बने।


*अष्टम बोर्ड परीक्षा को देखते हुए विद्यार्थियों के आग्रह पर सामाजिक विज्ञान विषय कि revision कराया गया और OMR भरने संबंधी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुक्ता कुमारी राजकुमार वर्मा,बाल संसद की अध्यक्ष अंकिता कुमारी प्रधानमंत्री सुरभि कुमारी,शिक्षा मंत्री सुहाना कुमारी, लक्ष्मी,निशा,अंजलि, पूनम,नमिता, मुस्कान, सोनाई चंद्रा, अंगद,अनुज,निखिल,अमर मोदी,पूजा,कशिश आदि सक्रिय रहे।

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