” वे प्रतिभाएं, जो प्रकाश में नहीं आती हैं ” ये लेख जो सोशल मीडिया में वायरल हो रही है जो श्री श्री रविशंकर जी के बहन भानुमती नरसिम्हन जी ने लिखी है

                  (कार्यालय)
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी की बहन एवम् इंटरनेशनल वूमेंस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्ष श्रीमती भानुमति नरसिम्हन ने लिखी है की

हाल ही में मैंने हमारे आने वाले इंटरनेशनल वूमेंस कॉन्फ्रेंस ( IWC )के फैशन शो में मॉडल के तौर पर एक नई मां को आमंत्रित किया।मेरा विचार था कि उनका सौंदर्य और प्रतिभा सबके सामने आनी चाहिए।एक नवयौवना मां,जिसने अपने मातृत्व के कर्तव्यों को पूर्ण रूप से निभाने के लिए काम से छुट्टी ले रखी है।हमारी बातचीत के दौरान,मैंने उन्हें परामर्श दिया कि वह अपने दो वर्षीय बेटे को भी अपने साथ रैंप पर लेकर आएं।बेटे का ज़िक्र करने पर मां की आंखों में चमक आ गई।उन्होंने पूछा,” क्या वह भी मॉडल बन सकता है, मैं उसकी पीछे रहकर मदद करूंगी।” 

इस छोटी सी बातचीत ने मुझे महिलाओं की इस आदत के बारे में विचार करने पर मजबूर किया कि वे दूसरों को आगे करती हैं और स्वयं सबके आकर्षण का केंद्र बनने से दूर रहती हैं।बहुत अधिक दिखावे और सजने – धजने के इस युग में,इसे कमजोरी का चिन्ह माना जाएगा।लेकिन,यदि आप वास्तव में इसके बारे में सोचें,तो यह गहरे आत्मविश्वास का प्रतिबिंब भी हो सकता है,जिसे किसी का ध्यान खींचने की चाहत नहीं है।

जैसे जंगल में फूल होते हैं,जिन पर किसी का ध्यान नहीं जाता है,वैसे ही ऐसी महिलाएं भी हैं,जो पहचान पाने के लिए नहीं,बल्कि अपने सहज स्वभाव के कारण चमकती हैं।उनके जीवन में जो करुणा और खुशी होती है,वह उनके परिवारों,समाज और समुदायों में फैल जाती है।विशेषकर यह बात ग्रामीण महिलाओं के लिए सत्य है।वह सामने नहीं आना चाहती हैं।मैंने देखा है कि उनका ध्यान कार्यों को करने और दूसरों की मदद करने पर केन्द्रित होता है,ताकि वे बहुत अच्छे बन सकें।शांति और विनम्रता के साथ,भिन्नता लाने की इस क्षमता के बारे में शहर की महिलाओं और पुरुषों को गांव की महिलाओं से सीखना चाहिए।

 

अच्छा नेतृत्व केवल मंच को घेर लेना नहीं है,बल्कि यह वह जगह होती है,जहां से प्रत्येक व्यक्ति को देखा और जाना जा सकता है।प्रायः नेता ऐसी शांत जगहों पर रहते हैं,जहां वे स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं और स्वयं के साथ आराम से रहते हैं।यह शक्तिशाली स्थान,तब उभरता है,जब एक व्यक्ति उत्साह,वैराग्य एवम् करुणा जैसे गुणों में संतुलन को पा लेता है,जो जीवन के चक्र को पूर्ण करते हैं।यह संतुलन महिलाओं की सभी भूमिकाओं,जैसे – पत्नी, मां,दादी मां,बहन,मित्र,नेता,मार्गदर्शक,शिक्षक आदि में सरलता से आ जाता है।

बिना उत्साह के महिलाओं में गर्भावस्था की पीड़ा से गुजरने और बच्चे के पालन – पोषण की शक्ति नहीं होगी।जिस प्रकार से हर दिन वह अपने परिवार की देखभाल करती हैं,वह बिना उत्साह और प्रतिबद्धता के एक असहनीय बोझ बन जाएगा।सत्यनिष्ठ बच्चों और नाती – पोतों का पालन – पोषण करने के लिए उत्साह,जिसमें वैराग्य भी हो और करुणा की आवश्यकता होती है।

महिलाएं जहां भी जाती हैं,वे अपने कोमल,पोषण देने वाले और संवेदनशील स्वभाव के द्वारा शांति एवम् सामंजस्यपूर्ण वातावरण का निर्माण कर लेती हैं।यहां तक कि व्यावसायिक जगत में भी,महिलाएं अपने पुरुष सहकर्मियों की तुलना में सफलता का श्रेय अन्य लोगों के साथ बांटने के लिए कहीं अधिक तैयार रहती हैं।जब एक महिला की किसी उपलब्धि के लिए उसकी प्रशंसा की जाती है,तो प्रायः हमें यह शब्द सुनने को मिलते हैं, ” यह पूरी टीम का प्रयास था ” या 

” यह काम का एक छोटा सा अंश था “।लक्ष्य के प्रति उत्साह,पहचान पाने के लिए वैराग्य और आसपास मौजूद लोगों के प्रति करुणा एक अच्छे नेतृत्व का चिन्ह है,जिससे सबका भला होता है।

ये स्त्रैव गुण किसी लिंग का विशेषाधिकार नहीं हैं।

संसार पर सकारात्मक प्रभाव डालने और जीवन के चक्र को शानदार एवम् रंगभरा बनाने के लिए,इन गुणों का पोषण स्त्री और पुरूष में समान रूप से किया जा सकता है।मस्तिष्क से हृदय की आंतरिक यात्रा में यह संभावित उत्प्रेरक है,जो हमारे बाहरी संसार को विवाद से शांति,प्रतिस्पर्धा से सहयोग और लालच से उदारता की ओर रूपांतरित करता है।

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