‘मासूम बच्चियों की शादी’ का बिल इराकी संसद में पेश

मुस्लिम लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र सीमा खत्म करने के प्रस्ताव की हो रही आलोचना

अगर लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र सीमा खत्म कर दी जाये तो एक तरह से बहशियों को बच्चियों से रेप का लाइसेंस ही मिल जायेगा। जी हां, ऐसे में इराक में मुस्लिम लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र सीमा समाप्त करने संबंधी संसद में पेश प्रस्ताव को बच्चियों से रेप का बिल ही कहा जायेगा। जो हो, इस प्रस्ताव की काफी आलोचना हो रही है और माना जा रहा है कि इससे बच्चियों से दुष्कर्म का लाइसेंस मिल जाएगा।

हालांकि इससे पहले लड़कियों की शादी को लेकर कंजर्वेटिव शित्ते के प्रतिनिधियों ने 31 अक्टूबर को 1959 के कानून में संशोधन के साथ एक बिल प्र्रस्तुत किया था। अबतक के कानून में लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल है। अब नये कानून के तहत शित्ते और सुन्नी समुदाय के धार्मिक नेताओं की सहमति पर किसी भी उम्र की लड़की की शादी हो सकेगी। लिबरल इंडिपेंडेंट सांसद फाइक अल-शेक ने कहा कि नये कानून के कारण जजों को शित्ते और सुन्नी उलेमाओं की बात मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने 9 साल की लड़कियों की शादी की इजाजत है ठीक उसी उम्र में जब आयशा की पैगंबर से शादी हुई थी।

दूसरी ओर संसद में पेश किए गये उक्त प्रस्ताव पर सोशल मीडिया पर आलोचनाओं की बाढ़ आ गयी है। पूर्व सैनिक हैदी अब्बास ने कहा कि यह कानून इस्लामिक स्टेट के लिए सही है, जो बच्चों के रेप को कानूनी जामा पहनाता है। बसरा शहर के 40 वर्षीय एक शिक्षक अली लफ्ता ने कहा कि यह निर्दोष बच्चों की हत्या जैसा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इसकी आलोचना की है और महिलाओं व लड़कियों के खिलाफ भेदभाव को संस्थागत नहीं बनाने को जरूरी बताया है।

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